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रविवार

आज ‘हिन्दुस्तान’ दैनिक में प्रकाशित कविता की कुछ पंक्तियाँ ब्लोगर मित्रों को सप्रेम....







आज 20 दिसम्बर’09 को हिन्दुस्तान दैनिक (रीमिक्स) पटना, मुजफ्फरपुर एवं भागलपुर संस्करण  में प्रकाशित अपनी कविता ‘अफसोस के लिए कुछ शब्द’ की कुछ पंक्तियाँ ब्लोगर मित्रों को सादर भेंट कर रहा हूँ.... प्रतिक्रिया अपेक्षित ।

...... हमें बातें करनी थी पत्तियों से 
और इकट्ठा करना था तितलियों के लिए
ढेर सारा पराग
..... ........
हमें रहना था अनार में दाने की तरह 
मेंहदी में रंग 
और गन्ने में रस बनकर


हमें यादों में बसना था लोगों के
मटरगश्ती भरे दिनों सा
और दौड़ना था लहू बनकर
  सबों की नब्ज में


अफसोस कि हम ऐसा
कुछ नहीं कर पाये...


जैसा करना था हमें..।

 -अरविन्द श्रीवास्तव,अशेष मार्ग, मधेपुरा,मो-०९४३१० ८०८६२.

6 टिप्‍पणियां:

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत बहुत बधाई !!

डा राजीव कुमार ने कहा…

बेहतरीन कविता ...वैसे आज सबेरे-सबेरे अखबार में पढ़ लिया था , बधाई...!

परमजीत सिहँ बाली ने कहा…

बेहतरीन कविता ..
बहुत बहुत बधाई !!

अविनाश वाचस्पति ने कहा…

अच्‍छे शब्‍द
बेहतर भाव

अनिल जनविजय ने कहा…

कविता बहुत अच्छी लगी, भाई!

Ashok Kumar pandey ने कहा…

अच्छी कविता

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