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बुधवार

शहंशाह आलम का ‘वितान’




मकालीन कविता के सशक्त कवि शहंशाह आलम की नयी कृति ‘वितान’ उनके काव्य फलक का वितान है, पगडंडियों से महानगर की यात्रा का महाभियान है। यह पुस्तक विपुल संभावनाओं का सामुच्य है, पुस्तक की कविताओं में कवि की  अदम्य जिजीविषा, विचारोत्तेजक भावधारा, नवीन शिल्प एवं कला  सुदृढ़ रूप में दिखती है। वैचारिकता और सम्वेदनाओं से बुनी गयी वितान की तमान कविताएँ समकालीन काव्य परिदृश्य में नवीनता का अहसास कराती है। डा. रमाकांत शर्मा के अनुसार ‘डिप्रेशन के इस महादौर में शहंशाह आलम की कविताएं विश्वास को टूटने नहीं देती, बल्कि खूबसूरत दुनिया का ख़्वाब बनाए रखती है।’ बतौर बानगी प्रस्तुत है वितान से ‘स्त्रियां’ शीर्षक कविता  -

स्त्रियां हैं इसलिए
फूटता है हरा रंग वृक्षों से
उड़ रहे सुग्गे से

स्त्रियां हैं इसलिए
शब्द हैं वाक्य हैं छन्द हैं
विधियां हैं सिद्धियां हैं
भाद्रपद हैं चैत्र है

इसलिए अचरज है
अंकुर हैं फूटने को आतुर।

प्रकाशकः समीक्षा प्रकाशन
डा. राजीव कुमार
मोबाइल- 09471884999/09334279957.

1 टिप्पणी:

अनामिका की सदाये...... ने कहा…

आपका आभार जो ऐसे नामी लेखक की रचना पढाने का मौका दिया.

आप की रचना 9 जुलाई के चर्चा मंच के लिए ली जा रही है, कृप्या नीचे दिए लिंक पर आ कर अपने सुझाव देकर हमें प्रोत्साहित करें.
http://charchamanch.blogspot.com
आभार
अनामिका

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